Mantra for Mangal
!!!—:मंगल के मंत्र:—!!! ज्योतिष में नव ग्रह व बारह भावों का अपना एक महत्वपूर्ण योगदान होता है कुंडली में हर ग्रह अपना शुभ अथवा अशुभ फल अपनी महादशा व अन्तर्दशा में देते हैं अगर कुंडली में कोई गृह शुभ/बलि अवस्था में है पर किसी पाप या नीच गृह के साथ युक्त है तो उसका उपाय किया जाना चाहिए और अगर नीच होकर किसी शुभ गृह के साथ बैठा है तो उसको बलि बनाना आवश्यक है वर्ना अपना तो फल खराब देगा ही साथ जो शुभ गृह बैठा है उसका भी शुभ फल नष्ट कर देता है !जैसे कुंडली में अगर मंगल शुभ है लेकिन उसका फल शुभ नहीं मिल रहा तो उपाय के तौर पर उसके अनुपात जितने बताशे जल प्रवाह करने चाहिए ! इसके विपरीत अगर मंगल नीच है या अशुभ ग्रहों से युक्त है तो उपाय स्वरूप उसके अनुपात के जितनी गुड की रेवड़ियां जल प्रवाह करनी चाहिए व मंगल का अपनी सुविधानुसार मन्त्र का यथाशक्ति जाप व दान करना चाहिए मंगल के मन्त्र – मंगल का वैदिक मंत्र :—>“ऊँ अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्यअयम। अपा रेता सिजिन्नवति !” मंगल गायत्री मंत्र :—>ऊँ क्षिति पुत्राय विदमहे लोहितांगाय धीमहि-तन्नो भौम: प्रचोदयात !” मंगल तंत्रोक्त मंत्र :—>ऊँ हां हंस: खं ख: ऊँ हूं श्रीं मंगलाय नम: ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: “ॐ हां हंस: खं ख: मंगल पौराणिक मंत्र :—>ऊँ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम । कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम “!! मंगल नाम मंत्र :—>ऊँ अं अंगारकाय नम: ऊँ भौं भौमाय नम: […]